राजस्थान के फेमस ऐतिहासिक मंदिर – Famous Historical Temples Of Rajasthan In Hindi

Famous Temples Of Rajasthan In Hindi, राजस्थान भारत के पश्चिमी भाग में मौजूद एक सुंदर राज्य है, जो ज्यादातर अपने शाही अतीत के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जहाँ दुनिया भर से लोग आते हैं। राजस्थान व्यापक रूप से अपने स्थापत्य भवनों के लिए जाना जाता है।  भारत का शाही राज्य राजस्थान उत्कृष्ट किलों, भव्य हवेलियों, शानदार महल और लक्जरी होटलों के अलावा कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध हैं।  जिनमे राजस्थान के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों में चोमुखा भैरवजी मंदिर, भांड देव मंदिर, अम्बामाता मंदिर, बोहरा गणेश मंदिर, नीमच माता मंदिर, उदयपुर की करणी माता और पाल गणेश मंदिर शामिल हैं।

राजस्थान का हर मंदिर अपनी अलग विशेषता के साथ स्थानीय लोगो, तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों के लिए आस्था प्रमुख केंद्र बने हुए है। तो यहाँ हम आपको अपने लेख में राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर के बारे में अवगत कराने जा रहे हैं –

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गलताजी मंदिर

गलताजी मंदिर

जयपुर के रीगल शहर के बाहरी इलाके में स्थित, गलताजी मंदिर एक प्रागैतिहासिक हिंदू तीर्थ स्थल है। गलताजी मंदिर में कई मंदिर, पवित्र कुंड, मंडप और प्राकृतिक झरने हैं। यह राजसी मंदिर एक पहाड़ी इलाके में स्थित है जो एक खूबसूरत घाट से घिरा है जो हर साल यहां पर्यटकों को आकर्षित करता है। गलताजी मंदिर गुलाबी रंग के बलुआ पत्थर का उपयोग करके बनाया गया था और यह एक विशाल मंदिर परिसर है जिसमें विभिन्न मंदिर हैं। सिटी पैलेस के अंदर स्थित, इस मंदिर की दीवारें नक्काशी और चित्रों से सुशोभित हैं।

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जयपुर बिरला मंदिर

जयपुर बिरला मंदिर

जयपुर में शानदार बिरला मंदिर एक हिंदू मंदिर है डूंगरी पहाड़ी पर स्थित बिरला मंदिर का निर्माण वर्ष 1988 में बिरला द्वारा किया गया था। जो देश भर में स्थित कई बिरला मंदिरों में से एक का हिस्सा है। जो लक्ष्मी नारायण मंदिर, भगवान विष्णु (नारायण), संरक्षक और उनकी पत्नी लक्ष्मी, धन की देवी को समर्पित है। बिरला मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।

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स्वामीनारायण मंदिर जयपुर

स्वामीनारायण मंदिर जयपुर
Image Credit : Narendra Saini

हिंदू भगवान को समर्पित, नारायण सामोद पैलेस अपनी सुंदर वास्तुकला, शानदार मूर्तियों, मूर्तियों और नक्काशी के लिए जाना जाता है। हरे-भरे हरे-भरे वातावरण में इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। जयपुर की धार्मिक यात्रा करने वाले लोगों को इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाना चाहिए।

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम मंदिर

वैशाली नगर, जयपुर में स्थित अक्षरधाम मंदिर जयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। जो हिंदू भगवान,नारायण को समर्पित है। जो हिन्दू भक्तो के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था केंद्र माना जाता है। मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला, शानदार मूर्तियों, मूर्तियों और नक्काशी के लिए जाना जाता है। अक्षरधाम मंदिर भारत के कुछ प्रमुख शहरों में बने प्रसिद्ध नौ मंदिरों में से एक है। ये मंदिर बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण द्वारा निर्मित, स्वामीनारायण संप्रदाय के तहत बनाए गए थे। और यह मंदिर स्वामीनारायण मंदिर या स्वामीनारायण अक्षरधाम के रूप में भी जाना जाता है। जो जयपुर में घूमने के लिए सबसे पवित्र और सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है।

और पढ़े : जयपुर का अक्षरधाम मंदिर घूमने की जानकारी

मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर

मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर

जयपुर में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित मोती डूंगरी मंदिर जयपुर के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है जो मोती डूंगरी पैलेस से घिरा है। भगवान गणेश को समर्पित मोती डूंगरी गणेश मंदिर निर्माण 1761 में सेठ जय राम पल्लीवाल की निगरानी में किया गया था। आपको बता दे की दो किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ मंदिर भारतीय उपमहाद्वीप की वास्तुकला की प्रगति का प्रमाण है। जो तीन गुंबदों से सुशोभित है जो भारत में तीन प्रमुख धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जहाँ मंदिर, जटिल पत्थर की नक्काशी के अलावा, संगमरमर पर बनाई गई पौराणिक छवियों के साथ अपने उत्कृष्ट अक्षांश के लिए जाना जाता है, जो कला-प्रेमियों के लिए एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

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गोविंद देव जी मंदिर जयपुर

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राजस्थान के जयपुर में सिटी पैलेस परिसर में स्थित गोविंद देव जी मंदिर राजस्थान में उच्च धार्मिक मूल्य के साथ जयपुर का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। आपको बता दे की गोविंद देव जी मंदिर राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है। जो  गोविंद देव जी या भगवान कृष्ण को समर्पित है। और वृंदावन के ठाकुर श्री कृष्ण के 7 मंदिरों में से एक है जिसमें श्री बांके बिहारी जी, श्री गोविंद देव जी, श्री राधावल्लभ जी और चार अन्य मंदिर शामिल हैं। यहाँ मंदिर के देवता श्री कृष्ण को दिन में सात बार आरती और भोग लगाया जाता है, जहाँ मंदिर में भगवान् दर्शन के लिए रोजाना बड़ी संख्या में भक्तो को दखा जाता हैं और जबकि भगवान् कृष्ण के जन्मदिवस  जन्माष्टमी के अवसर पर यहाँ हजारो की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते है।

और पढ़े : जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर के दर्शन की जानकारी

कल्चुरी दिगंबर जैन मंदिर

शहर से 14 किमी दूर सांगानेर में स्थित कल्चुरी दिगंबर जैन मंदिर जयपुर का प्रसिद्ध जैन मंदिर है जो जैन समुदाय के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन हुआ है। जिसमे भगवान् आदिनाथ की मूर्ति पद्मासन (कमल स्थिति) मुद्रा में विराजमान है। और आपको बात दे मंदिर लाल पत्थर से बना है और जिसमे आकर्षक नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर सात मंजिला मंदिर में आकाश-उच्च ‘शिखर’  है और इसका आंतरिक गर्भगृह में एक पत्थर का मंदिर है। जिसमे भगवान आदिनाथ की मूर्ति स्थापित है।

एकलिंगजी मंदिर

एकलिंगजी मंदिर

उदयपुर के उत्तर में 22 किमी की दूरी पर स्थित एकलिंगजी मंदिर राजस्थान के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। एकलिंगनाथ मंदिर हिंदू धर्म के भगवान शिव को समर्पित है जिसकी शानदार वास्तुकला हर साल कई हजारो पर्यटकों को को अपनी और आकर्षित करती है। यह दो मंजिला मंदिर छत और विशिष्ट नक्काशीदार टॉवर की अपनी पिरामिड शैली के साथ शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है यह अपने काले संगमरमर से लगभग 50 फीट ऊँचे बने एकलिंगजी (भगवान शिव) की एक चार-मुखी मूर्ति के लिए जाना जाता है। जो भगवान शिव के चार रूपों को दर्शाते हैं। जहाँ चाँदी के साँप द्वारा गढ़ा गया शिवलिंग एकलिंगजी मंदिर का प्रमुख पर्यटक आकर्षण है।

जगदीश मंदिर

जगदीश मंदिर

भगवान विष्णु को समर्पित जगदीश मंदिर एक भव्य और राजसी संरचना है जो राजस्थान के लुभावने शहर उदयपुर के सिटी पैलेस परिसर में स्थित है। जो भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसे भगवान लक्ष्मी नारायण के नाम से भी जाना जाता है, और पूरे उदयपुर शहर में सबसे महत्वपूर्ण मंदिर होने के लिए प्रतिष्ठित है। इस भव्य मंदिर के प्रवेश द्वार को सिटी पैलेस के बारा पोल से देखा जा सकता है। जगदीश मंदिर वास्तुकला की इंडो-आर्यन शैली में बनाया गया है और इसका निर्माण 1651 में महाराणा जगत सिंह द्वारा किया गया था, जिन्होंने 1628 से 1653 की अवधि में उदयपुर पर शासन किया था। मुख्य मंदिर में भगवान विष्णु की चार-सशस्त्र प्रतिमा है, जिसे काले पत्थर के एक टुकड़े से तराशा गया है।

और पढ़े : जगदीश मंदिर का इतिहास और घूमने की जानकारी

नीमच माता मंदिर

नीमच माता मंदिर

उदयपुर की फतेह सागर झील के किनारे हरी-भरी  पहाड़ी के ऊपर स्थापित नीमच माता मंदिर उदयपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है जो उदयपुर का प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ है।  आपको बता दे नीमच माता मंदिर को अम्बाजी के नाम से भी जाना जाता है जो उदयपुर शहर के महाराणाओं के शाही परिवार की गृह देवी मानी जाती है। और माना जाता है की मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में‘ यज्ञों ’के प्रदर्शन के लिए एक‘ हवन कुंड ’भी है। और इसके अलावा यहाँ मंदिर में हिंदू भगवान गणेश की एक मूर्ति भी स्थापित है।

सहस्त्र बाहु या सास बहु मंदिर

सहस्त्र बाहु या सास बहु मंदिर

सहस्त्र बाहु मंदिर उदयपुर से लगभग 22 किमी दूर, NH-8 पर नागदा गाँव में स्थित है।  जिसे सास-बहु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है,सहस्त्र बाहु मंदिर भगवान् विष्णु को समर्पित है, जहाँ सहस्त्र बाहु नाम का अर्थ,’एक लाख भुजाओं वाला’, जो विष्णु के रूपों में से एक है। मंदिर रामायण पर आधारित कई सुंदर नक्काशी से सुशोभित है।

और पढ़े : सास बहू मंदिर उदयपुर घूमने की जानकरी 

तनोट माता मंदिर जैसलमेर

तनोट माता मंदिर जैसलमेर
Image Credit : Abhishek Indoria

तनोट माता मंदिर राजस्थान के जैसलमेर से 120 किलोमीटर दूर तनोट गाँव में स्थित है। तनोट माता को देवी हिंगलाज का पुनर्जन्म माना जाता है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, तनोट पर भारी हमले और गोलाबारी हुई थी। लेकिन  मंदिर में कोई भी गोला या बम नहीं फटा। इसने लोगों के विश्वास को और अधिक बढ़ा दिया कि मंदिर में स्वयं देवी विराजमान है। इस कारण से तनोट माता का मंदिर पर्यटकों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

और पढ़े : जैसलमेर के तनोट माता के मंदिर के दर्शन की जानकारी

लक्ष्मीनाथ मंदिर जैसलमेर

लक्ष्मीनाथ मंदिर जैसलमेर
Image Credit : Govind k

जैसलमेर किले के अंदर स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर जैसलमेर के सबसे पुराने व लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। जो हिंदू देवता भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। कहा जाता है कि यहां की मूर्तियां पूरे देश में सबसे खूबसूरत मूर्तियों में से हैं जो जैसलमेर में एक प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ हैl लक्ष्मीनाथ मंदिर में मुख्य देवताओं के अलावा, अन्य देवताओं की पेंटिंग और मूर्तियों को भी देखा जाता है। इस मंदिर में एक साधारण वास्तुकला को बड़ी सुन्दरता से अलंकृत किया गया हैl जिसमे मंदिर के दरवाजे में चांदी की रूपरेखा प्रस्तुत की गई हैl

और पढ़े : जैसलमेर के लक्ष्मीनाथ मंदिर के दर्शन की जानकारी

रामदेवरा मंदिर

रामदेवरा मंदिर
Image Credit : Rodmal Yogi

जोधपुर पोखरण से 12 किलोमीटर की दूरी पर जैसलमेर मार्ग पर स्थित रामदेवरा मंदिर जैसलमेर के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। जो सिद्ध संत बाबा रामदेवजी को समर्पित है। जबकि कुछ लोग इसे भगवान राम को समर्पित मंदिर भी मानते हैं। आपको बता दे यह पवित्र तीर्थ स्थल बाबा रामदेवजी का प्रमुख विश्राम स्थल था जो सभी तीर्थ यात्रियों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ है।

और पढ़े : रामदेवरा का प्रसिद्ध बाबा रामदेव जी मंदिर जैसलमेर के दर्शन की जानकारी 

जैन मंदिर जैसलमेर

जैसलमेर के किले में स्थित, जैन मंदिर राजस्थान के जैसलमेर में स्थित हैं। मंदिरों से एक उच्च धार्मिक और प्राचीन इतिहास जुड़ा हुआ है। दिलवाड़ा शैली में निर्मित जैन मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, ये मंदिर ऋषभदेवजी और शंभदेवदेव जी को समर्पित हैं, जो जैन तीर्थंकर ‘तीर्थंकर’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। सभी सात मंदिर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक ही स्वर्ण-पीले जैसलमेरी पत्थर का उपयोग करके बनाए गए हैं। ये मंदिर पीले पत्थरों की दीवारों पर उकेरे गए जानवरों और मानव आकृतियों के साथ बनी दिलवाड़ा शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है।

शांतिनाथ मंदिर जैसलमेर

शांतिनाथ मंदिर जैसलमेर किले के अंदर स्थित है। यह मंदिर अपनी शानदार स्थापत्य शैली और उल्लेखनीय बलुआ पत्थर की नक्काशी के लिए जाता है। यह मंदिर श्री शांतिनाथ को समर्पित है, जिसे जैन तीर्थंकर के रूप में जाना जाता है और यह स्वर्ण किले के भीतर सात प्रमुख जैन मंदिरों में से एक है। 16 वीं शताब्दी का यह मंदिर अपने विश्वासियों के बीच एक धार्मिक महत्व रखता है। कुल 24 तीर्थंकर मूर्तियाँ हैं जो इस मंदिर के अंदर रखी गई हैं।

चंद्रप्रभु मंदिर जैसलमेर

चंद्रप्रभु मंदिर जैसलमेर
Image Credit : Jereesh Thomas

चंद्रप्रभु मंदिर 16 वीं शताब्दी में बना एक अनुकरणीय जैन मंदिर है। यह उन सात मंदिरों में से एक है जिनका निर्माण 8 वें तीर्थंकर जैन पैगंबर चंद्रप्रभु जी के लिए किया गया था। जैसलमेर किले के अंदर स्थित यह जैन तीर्थस्थल वर्ष 1509 के आसपास का है। स्वर्ण किले के अंदर स्थित, चंद्रप्रभु मंदिर वास्तुकला की एक प्राचीन राजपूत शैली का प्रतीक है। लाल पत्थर से बना जैन तीर्थ सुंदर गलियारों के साथ जटिल डिजाइन में उकेरा गया है। आंतरिक रूप से बारीक मूर्तियों वाले खंभों की एक श्रृंखला बनाई जाती है।

नारायणी माता मंदिर अलवर

नारायणी माता मंदिर अलवर
Image Credit : Pavan Jonwal

नारायणी माता मंदिर राजस्थान के मुख्य शहर अलवर से लगभग 80 और अमनबाग से 14 किलोमीटर दूर सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के किनारे पर स्थित अलवर का एक बहु प्रतिष्ठित मंदिर है। जहा नारायणी माता भगवान शिव की पहली पत्नी सती का अवतार रूप मानी जाती है। नारायणी माता मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है और इसे बहुत अच्छी तरह से सजाया और डिजाइन किया गया है। मंदिर की साइड में छोटा सा गर्म पानी का झरना इसे और अधिक लोकप्रिय बनाता है। आपको बता दे नारायणी माता मंदिर भारत में सैन समाज का एकमात्र मंदिर है जिसकी पवित्रता माउंट आबू, पुष्कर और रामदेवरा में मंदिरों के समान मानी जाती है।

और पढ़े : नारायणी माता मंदिर के दर्शन की जानकारी

पांडुपोल हनुमान मंदिर अलवर

पांडुपोल हनुमान मंदिर अलवर

पांडुपोल का हनुमान मंदिर राजस्थान के सरिस्का राष्ट्रीय बाघ अभयारण्य के अंदर स्थित है। जिसमे भगवान हनुमान की एक विशाल मूर्ति वैराग्य स्थिति में स्थापित हैl अरावली रेंज के ऊंचे कगार वाले पहाड़ी के बीच,स्थित पांडुपोल का प्राचीन हनुमान मंदिर अलवर में सबसे अधिक देखी जाने वाली जगहों में से एक हैL मंदिर के परिसर में, लंगूर, मकाक और कई प्रकार के पक्षियों और अपने भव्य 35-फुट झरने के लिए भी प्रसिद्ध हैl पांडुपोल हनुमान मंदिर घूमने के लिए तीर्थ यात्रियों के साथ-साथ प्रकृति व जीव प्रेमियों के लिए भी अलवर की शानदार जगहों में से एक है।

और पढ़े : पांडुपोल के हनुमानजी के मंदिर के दर्शन की जानकारी

भर्तृहरि मंदिर अलवर

भर्तृहरि मंदिर अलवर
Image Credit : Manoj kumar

भर्तृहरि मंदिर अलवर शहर से लगभग 30 किमी दूर और प्रसिद्ध सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के करीब स्थित अलवर में सबसे प्राचीन पवित्र स्थलों में से एक है। जो आस्था और शांति का महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु है। मंदिर का नाम भरत  (उज्जैन का शासक) के नाम पर रखा गया है। मंदिर पारंपरिक राजस्थानी शैली में विस्तृत दीर्घाओं, शिखर और मंडपों के पुष्प डिजाइन किए गए स्तंभों के साथ बनाया गया है। जो अलवर में ऐतिहासिक महत्व रखता है। भर्तृहरि मंदिर मंदिर तीन दिशाओं से पहाड़ियों से घिरा होने के कारण  श्रद्धालुओं के लिए और अधिक लोकप्रिय बना हुआ है।

तिजारा जैन मंदिर अलवर

तिजारा जैन मंदिर अलवर

तिजारा जैन मंदिर दिल्ली से 110 किलोमीटर और दिल्ली-अलवर राजमार्ग पर अलवर से 55 किलोमीटर दूर स्थित जैनों का लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। वर्ष 1956 में स्थापित प्राचीन जैन मंदिर आठ जैन तीर्थंकरों, यानी जैन धर्म गुरु को समर्पित है। जो जैन समुदाय के लिए महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है और यह जैनों के साथ- साथ प्राचीन इतिहास प्रेमियों के लिए भी लोकप्रिय बना हुआ है। जो अलवर में घूमने के लिए सबसे आकर्षक जगहों में से एक है।

और पढ़े : तिजारा जैन मंदिर अलवर के दर्शन की जानकारी 

नीलकंठ महादेव मंदिर अलवर

नीलकंठ महादेव मंदिर अलवर

अलवर जिले के राजगढ़ तहसील में स्थित नीलकंठ मंदिर भगवान शिव के निवास के लिए प्रसिद्ध है, जो उनके नीलकंठ अवतार को समर्पित है। बता दे की मंदिर का निर्माण 6 वीं और 9 वीं शताब्दी ई के बीच महाराजा धिराज मथानदेव द्वारा किया गया था, जिसकी संरचना समय के साथ-साथ जीर्ण-शीर्ण हो गई है, जिसमे मंदिर का एक बड़ा हिस्सा अब क्षतिग्रस्त हो गया है जबकि थोड़ा हिस्सा अभी भी बरकरार है। फिर भी यह भगवान शिव के भक्तों के बीच एक अत्यधिक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बना हुआ है। और आपको बात दे नीलकंठ मंदिर अपने धामिक महत्त्व, उत्कृष्ट पत्थर की नक्काशी और यहां के हरे-भरे जंगलों के लिए नीलकंठ मंदिर घूमने के लिए अलवर के आकर्षक तीर्थ स्थलों में से एक है।

और पढ़े : नीलकंठ मंदिर अलवर के दर्शन की जानकारी

मोती डूंगरी

अपने हंसमुख महल, गणेश और लक्ष्मी नारायण मंदिरों के लिए प्रसिद्ध, मोती डूंगरी पर्यटकों का पसंदीदा स्थान है। पहाड़ी की तलहटी में स्थित गणेश मंदिर अपने भक्तों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ है। मोती डूंगरी मूल रूप से वर्ष 1882 में बनाया गया था। वर्ष 1928 तक, यह अलवर के शाही परिवार का मुख्य निवास था। 1928 के बाद, महाराजा जय सिंह ने पुराने महल को ढहाने का फैसला किया और बाद में इसकी जगह एक और शानदार इमारत बनाई गई थी।

ब्रह्मा मन्दिर

ब्रह्मा मन्दिर

जगतपिता ब्रह्मा मंदिर या पुष्कर, राजस्थान में स्थित ब्रह्मा मंदिर, भगवान ब्रह्मा को समर्पित सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जिन्हें ब्रह्मांड का निर्माता माना जाता है। भारत में ब्रह्मा को समर्पित एकमात्र मंदिर होने के कारण, यह हर साल लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। ब्रह्मा मंदिर की उपस्थिति के कारण पुष्कर का छोटा शहर पवित्र लगता है। यह दुनिया के प्रमुख दस धार्मिक स्थानों और भारत में हिंदुओं के लिए पांच पवित्र तीर्थस्थलों में से एक  है। लगभग 2000 साल पुराने ब्रह्मा मंदिर का निर्माण मूल रूप से 14वीं शताब्दी का माना जाता है। मंदिर में संगमरमर और विशाल पत्थर की शिलाओं से निर्मित, इसमें भगवान ब्रह्मा की दो पत्नियों, गायत्री और सावित्री के चित्र हैं।

और पढ़े : ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर के दर्शन और पर्यटन स्थल की जानकारी

वराह मंदिर

वराह मंदिर
Image Credit : Sumeet Singroha

वराह मंदिर पुष्कर का सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन मंदिर हैं जोकि भगवान वराह बोअर को समर्पित है। यह भगवान विष्णु का तीसरा अवतार माना जाता है। वराह मंदिर में जंगली सूअर के रूप में अवतरित हुए भगवान विष्णु की एक प्रतिमा स्थापित है। आप जब भी पुष्कर जाएं तो भगवान विष्णु के इस अद्भुत अवतार का दर्शन करने के लिए वराह पुष्कर मंदिर जरूर जाएं।

और पढ़े : वराह मंदिर पुष्कर के दर्शन की जानकारी और पर्यटन स्थल

दिगंबर जैन मंदिर पुष्कर

दिगंबर जैन मंदिर पुष्कर

अजमेर में स्थित दिगंबर जैन मंदिर स्‍थापत्‍य कला की दृष्टि से एक भव्य जैन मंदिर है। जो मंदिर, ऋषभ या आदिनाथ (Rishabha Or Adinatha) को समर्पित है इसे सोनीजी की नसियां (Soniji Ki Nasiyan) के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भारत में सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है। दिगंबर जैन मंदिर की बलुआ पत्थर की वास्तुकला आपको जरूर पसंद आएगी, और जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले इस अलंकृत, जटिल “सोने से सजे मंदिर” का नजारा आपको अचंभित कर सकता है।

और पढ़े : सोनी जी की नसियां दिगम्बर जैन मंदिर के दर्शन की जानकारी

सावित्री मंदिर

सावित्री मंदिर

पुष्कर एक पहाड़ी के ऊपर स्थित सावित्री मंदिर एक भव्य मंदिर है। इस मंदिर में परमपिता ब्रह्मा जी की पहली पत्नी सावित्री और दूसरी पत्नी गायत्री की मूर्ती स्थापित हैं। हालाकि सावित्री देवी को हमेशा पहले पूजा जाता हैं। आपको बता दे मंदिर में लगभग डेढ़ घंटे की कठिन व रोमांच से भरपूर चढ़ाई है। उसके बाद भी सावित्री मंदिर तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों के लिए लोकप्रिय स्थल बना हुआ है।

और पढ़े : पुष्कर सावित्री माता का मंदिर के दर्शन की जानकारी

पाप मोचनी मंदिर

पाप मोचनी मंदिर

पाप मोचनी मंदिर राजस्थान राज्य के सबसे प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक है। यह मदिर देवी गायत्री को समर्पित हैं जिन्हें पाप मोचनी माना जाता है। यह भी माना जाता हैं कि यह एक शक्तिशाली देवी हैं जो भक्तजनों को पापो से मुक्ति देती हैं। यह मंदिर महाभारत की कथा से भी जुड़ा हैं जब गुरुद्रोर्ण पुत्र अश्वत्थामा ने इसी मंदिर में जाकर मोक्ष की याचना की थी।

रंगजी मंदिर

रंगजी मंदिर

कृपालु और विशिष्ट रंगजी मंदिर एक और लोकप्रिय मंदिर है,मंदिर भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले भगवान रंगजी को समर्पित है। जो हर साल हजारों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को अपनी और मनमोहित करता है। मंदिर की वास्तुकला में दक्षिण भारतीय शैली, राजपूत शैली और मुगल शैली का प्रभाव भी देखने को मिलता है।

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श्री पंचकुंड शिव मंदिर

श्री पंचकुंड शिव मंदिर
Image Credit : Chetna Kumari

पुष्कर शहर के मध्य में झील के तट पर स्थित, महादेव मंदिर पुष्कर शहर में एक लोकप्रिय हिंदू तीर्थ स्थल है। भगवान् शिव को समर्पित मंदिर को 19 वीं शताब्दी में बनाया गया था, जिसमे एक शानदार स्थापत्य शैली देखी जा सकती है। सफेद पत्थरों में निर्मित मंदिर में मंदिर के भगवान महादेव की पांच मुख वाली मूर्ति है। इसके चार मुख उन चार दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनका वे सामना करते हैं, जबकि पांचवा ऊपर की ओर दिखता है जो पवित्रता और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक है। पाँच मुखों को सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान कहते हैं। महादेव मंदिर में हर साल शिवरात्रि बहुत उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई जाती है, जिसमे हजारो श्रद्धालुओं को शामिल होते हुए देखा जाता है।

महामंदिर मंदिर

महामंदिर मंदिर

जोधपुर से मंडोर की ओर दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित महामंदिर मंदिर जोधपुर के सबसे लोकप्रिय व बड़े मंदिरों में से एक है इस मंदिर को 84 स्तंभों द्वारा समर्थित किया गया है, जो अपने आस-पास के परिसर में जटिल मुद्राओं, जटिल आकृति और अन्य कलाकृति को दर्शाते हुए भित्ति चित्रों और नक्काशी से सजाए गए हैं। मंदिर में एक सुंदर डिज़ाइन किया गया हॉल है जो योग कक्षाओं के लिए उपयोग किया जाता है। इस मंदिर का सबसे अच्छा हिस्सा इसकी शाही वास्तुकला है जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है।

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चामुंडा माता मंदिर

चामुंडा माता मंदिर
Image Credit : Sundeep Soni

मेहरानगढ़ किले के अंत में स्थित, चामुंडा माता मंदिर जोधपुर में सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। देवी को जोधपुर के निवासियों का मुख्य देवता माना जाता है और उन्हें ‘इष्ट देवी’ या राजपरिवार की सबसे बड़ी देवी माना जाता है। यह पवित्र मंदिर बहुत सारे भक्तों और उपासकों को दशहरा और नवरात्रि के त्योहारों के दौरान आकर्षित करता है।जो हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। और माना जाता है चामुंडा माता राव जोधा की पसंदीदा देवी थीं और इसलिए उनकी मूर्ति को 1460 में मेहरानगढ़ किले में पूरी धार्मिक प्रक्रिया के साथ किले में स्थापित किया गया था।

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महामंडलेश्वर महादेव

महामंडलेश्वर महादेव
Image Credit : Divyanshu Vyas

महामंडलेश्वर महादेव जोधपुर का सबसे प्राचीन व लोकप्रिय मंदिर है, जिसका निर्माण लगभग 923 ईस्वी में मंडल नाथ द्वारा किया गया था। यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, और भगवान शिव और देवी पार्वती के विभिन्न उत्तम चित्रों के साथ खूबसूरती से सजाया गया है। मंदिर को मंडलनाथ महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। जो जोधपुर का एक प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ है। जो मार्च या अप्रैल के महीने में होने वाले मंडलनाथ मेले के दौरान हजारो तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करता है।

ओम बन्ना मंदिर

ओम बन्ना मंदिर
Image Credit : Rushal Keny

ओम बन्ना मंदिर, जिसे ‘बुलेट बाबा मंदिर’ के रूप में जाना जाता है, एक असामान्य बैकस्टोरी वाला मंदिर है, जो छोटिला गांव के पास, पाली और जोधपुर के बीच NH65 पर है। यह ओम बन्ना को समर्पित एक तीर्थस्थल है, जहां एक यात्री अपनी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट से गया था। जोधपुर से 50 किमी और पाली से 20 किमी दूर स्थित यह मंदिर धार्मिक रूप से आसपास के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। यह मंदिर रॉयल एनफील्ड के उत्साही लोगों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। आस-पास के गाँवों के सैकड़ों भक्त प्रतिदिन यहाँ आते हैं।

और पढ़े : ओम बन्ना मंदिर(बुलेट बाबा मंदिर) के दर्शन की जानकारी

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर
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पाली शहर में स्थित सोमनाथ मंदिर एक प्रसिद्ध भगवान शिव मंदिर है। मंदिर निर्माण गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी ने विक्रम संवत 1209 में किया था। पाली के मुख्य बाजार में स्थित, सोमनाथ मंदिर में अद्भुत शिल्प कला है जो अपने समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है, सोमनाथ मंदिर के शिखर पर नक्काशी है। सोमनाथ मंदिर के अंदर, मंदिर के अंदर पार्वती, गणेश, और नंदी की मूर्तियों के साथ एक शिवलिंग भी स्थापित है। जो तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ है।

कैला देवी मंदिर करौली

कैला देवी मंदिर करौली
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कैला देवी मंदिर करौली से 23 किमी की दूरी पर स्थित है, जो देवी दुर्गा के 9 शक्ति पीठों में से एक है। यह मंदिर कालीसिल नदी के तट पर बसा हुआ है और इसे बहुत ही खूबसूरती के साथ बनाया गया है। अगर आप करौली के पर्यटन स्थलों की सैर करने जा रहें हैं तो आपको इस भव्य मंदिर के दर्शन करने के लिए जरुर जाना चाहिए।

और पढ़े : कैला देवी मंदिर करौली के दर्शन और इसके पर्यटन स्थल की जानकारी

श्री महावीरजी जैन मंदिर

श्री महावीरजी जैन मंदिर
Image Credit : Sanjay Bafna

श्री महावीर जी जैन मंदिर भगवान महावीर को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है जो अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इस मंदिर के अंदर रखी भगवान की मूर्ति बहुत पुरानी है। इस मंदिर के अंदर विभिन्न पौराणिक स्थितियों की सोने से बनी सुंदर नक्काशी है जो भक्तों और यात्रियों को आकर्षित करती है।

मदन मोहनजी मंदिर

मदन मोहनजी मंदिर
Image Credit : Himanshu Bora

मदन मोहनजी मंदिर करौली का एक प्रमुख मंदिर है जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। मदन मोहनजी मंदिर भद्रावती नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति एक बहुत पुरानी है जिसके बारे में ऐसा माना जाता है कि यह अजमेर से श्री गोपाल एस नघजी द्वारा लाई गई थी। यह मंदिर दिखने में रंगीन है और भारी संख्या में भक्त इस मंदिर के दर्शन करने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए एकत्रित होते हैं।

और पढ़े : करौली के मदन मोहन जी मंदिर के दर्शन की जानकारी

देवी गोमती धाम

देवी गोमती धाम
Image Credit : Abhishek Pandey

नक्काश की देवी गोमती धाम मंदिर करौली का एक प्रसिद्ध मंदिर है जो भारी संख्या में भक्तों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। इस पवित्र धार्मिक स्थल में मां दुर्गा की मूर्तियाँ स्थापित हैं और यहां बहुत ही भक्ति के साथ माता की पूजा की जाती है। यहां स्थित एक निर्मंल जलसेन तालाब इस जगह की पवित्रता को और भी ज्यादा बढाता है। अगर आप करौली की यात्रा करने जा रहें हैं तो इस पवित्र स्थल के दर्शन करना न भूलें।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर करौली

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर करौली

राजस्थान में करौली के पास स्थित मेहंदीपुर मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। हनुमान जी के इस मंदिर को बेहद पवित्र माना जाता है। बता दें कि यहां पर रोजाना भारी संख्या में भक्त बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए आते हैं। अगर आप इस मंदिर के दर्शन करने जाते हैं तो यहां पर कई बुरी आत्माओं से पीड़ित लोगों को देख सकते हैं।

देव सोमनाथ मंदिर डूंगरपुर

देव सोमनाथ मंदिर डूंगरपुर
Image Credit : Vivek Sewak

देव सोमनाथ मंदिर डुंगरपुर से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भगवान शिव का एक बहुत ही सुंदर मंदिर है। सोम नदी के तट पर स्थित देव सोमनाथ मंदिर का निर्माण 12 वीं शताब्दी में सफेद पत्थर से किया गया था। इसमें 3 निकास हैं, जो पूर्व, उत्तर और दक्षिण की ओर हैं। इसका प्रवेश द्वार दो मंजिला हैं। गर्भगृह में एक ऊंचा गुंबद है। इसके सामने सभा मंडप है जिसे 8 राजसी स्तंभों पर बनाया गया है।

और पढ़े : डूंगरपुर के देव सोमनाथ मंदिर के दर्शन की जानकारी

बेणेश्वर मंदिर

बेणेश्वर मंदिर
Image Credit : Mohit Saini

बेणेश्वर मंदिर इस क्षेत्र का एक प्रमुख मंदिर है जो सोम और माही नदियों के संगम पर बनने वाले डेल्टा पर स्थित है। भगवान शिव के इस लिंग को स्वयंभू के नाम से भी जाता है। यह शिवलिंग 5 फीट ऊँचा है। बेणेश्वर मंदिर के समीप ही 1793 ई में निर्मित विशु मंदिर है जो जनकुंवरी की बेटी हैं। जनकुंवरी एक अत्यंत पूजनीय संत हैं और भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। अगर आप डूंगरपुर की यात्रा करने जा रहें हैं तो आपको भगवान शिव के इस मंदिर के दर्शन करने के लिए भी अवश्य जाना चाहिए।

और पढ़े : राजस्थान के बेणेश्वर धाम घूमने की जानकारी

विजय राजराजेश्वर मंदिर

विजय राजराजेश्वर मंदिर, गैबसागर झील के किनारे स्थित है। आपको बता दें कि यह मंदिर भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती को समर्पित है। यह मंदिर अपने समय की बेहतरीन वास्तुकला को प्रदर्शित करता है। विजय राजराजेश्वर मंदिर के निर्माण के लिए महारावल विजय सिंह द्वारा आदेश दिया गया था और यह 1923 में महारावल लक्ष्मण सिंह के शासनकाल में पूरा हुआ था।

नागफणजी

नागफणजी
Image Credit : Harshil Malasiya

नागफणजी अपने जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। जो न केवल डूंगरपुर के भक्तों को आकर्षित करता है, बल्कि यहां देश के कोने-कोने से लोग यात्रा करते हैं। इस मंदिर में देवी पद्मावती, नागफणजीपरश्वनाथ और धर्मेन्द्र की मूर्तियाँ स्थित है। इस मंदिर के पास स्थित नागफणजी शिवालय भी भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

खड़े गणेश जी का मंदिर कोटा

खड़े गणेश जी का मंदिर कोटा
Image Credit : Pulkit Prakash

कोटा के खड़े गणेश जी के मंदिर में स्थापित मूर्ती लगभग 600 साल से भी अधिक पुरानी हैं। यह स्थान कोटा के महत्वपूर्ण धार्मिक में स्थानों में से एक हैं। खड़े गणेश जी का मंदिर कोटा में चंबल नदी के बिल्कुल नजदीक स्थित एक पवित्र स्थल हैं। मंदिर के पास एक झील है जिसके आसपास कई मोरों की मौजूदगी इस स्थान को आकर्षित बनाती हैं। भगवान गणेश के इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह हैं कि मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ती खड़ी हैं जो कि पूरे भारत में भगवान गणेश की एक मात्र खड़ी मूर्ती मानी जाती हैं।

और पढ़े : कोटा के खड़े गणेश जी का मंदिर के दर्शन की जानकारी

गरडिया महादेव

गरडिया महादेव

गरडिया महादेव भगवान शिव का समर्पित के एक लोकप्रिय शिव मंदिर हैं। गरडिया महादेव कोटा शहर से थोडी दूरी पर स्थित है। यह मंदिर दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने में कामयाब रहा हैं। गरडिया महादेव एक ऐसा स्थान हैं जो एक पिकनिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है, और लोग अक्सर यहां पिकनिक मानाने के लिए आते हैं। क्योंकि चंबल नदी के तट पर स्थित होने के कारण नदी के पानी के जल की वजह से यहां शांति का एहसास तो होता ही है साथ में नदियों से उत्पन कई मनमोहक द्रश्य देखने को यहा मिल जाते हैं।

और पढ़े : कोटा के प्रसिद्ध गरडिया महादेव मंदिर दर्शन की जानकारी

गोदावरी धाम

गोदावरी धाम
Image Credit : Kapil Kumar Meena

गोदावरी धाम कोटा के दादाबाड़ी में स्थित पवन पुत्र हनुमान जी महाराज को समर्पित हैं। बजरंगवली का यह स्थान कोटा में चंबल नदी के तट पर स्थित है। मंदिर में भगवान गणपति, भगवान शिव, भैरव जी महाराज आदि की मूर्तियां सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

दिग्गी कल्याण जी मंदिर टोंक

दिग्गी कल्याण जी मंदिर टोंक
Image Credit : Deepak Soni

दिग्गी कल्याण जी मंदिर टोंक का एक पुराना मंदिर है जो अपनी प्राचीनता के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का शिखर बेहद आकर्षक है जो पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। मंदिर के शिखर को 16 खंबे सपोर्ट देते हैं जो दिखने में बेहद अदभुद हैं। यह मंदिर संगमरमर की सुरुचिपूर्ण वास्तुकला का एक अच्छा उदाहरण है। जब आप इस मंदिर के दर्शन करने जायेगे तो इसके पास स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के दर्शन करने के लिए भी जा सकते हैं।

बीसलदेव मंदिर

बीसलदेव मंदिर

बीसलदेव मंदिर राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में से एक है जो टोंक जिले से लगभग 60-80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आपको बता दें कि यह मंदिर गोकर्णेश्वर के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के आंतरिक भाग में एक शिवलिंग स्थित है। मंदिर में एक गोलार्द्ध का गुंबद है जो आठ ऊंचे खंभों पर टिका हुआ है और इन ऊंचे खंभों पर फूलों की सुंदर नक्काशी बनी हुई है, जो हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है।

हरणी महादेव मंदिर भीलवाड़ा

हरणी महादेव मंदिर भीलवाड़ा
Image Credit : Divyanshu Vyas

भीलबाड़ा के दर्शनीय स्थलों में से एक हरणी महादेव मंदिर राजस्थान के डारक परिवार के पूर्वजों द्वारा स्थापित किया गया एक शिव मंदिर हैं। जोकि शहर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सुरम्य पहाड़ियों से घिरा हुआ यह दर्शनीय स्थल पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों के बीच प्रसिद्ध हैं।

और पढ़े : भीलवाड़ा के हरणी महादेव मंदिर के दर्शन और पर्यटन स्थल की जानकारी

धनौप माता जी मंदिर

धनौप माता जी मंदिर
Image Credit : Chhaganlal Kumawat

भीलबाड़ा का दर्शनीय स्थल धनौप माता जी मंदिर संगरिया से 3 किलोमीटर दूरी पर एक छोटे से गांव में स्थित है। धनौप माता के मंदिर में रंगीन चमकदार लाल दीवारें और खंभे हैं। और मंदिर में खूबसूरत संगमरमर का फर्श और काले पत्थर के रूप में देवी शीतला माता (देवी दुर्गा) की मूर्ति स्थापित है। और आपको बता दे धनौप माता जी मंदिर में आप शीतला माता के दर्शन का लाभ भी उठा सकते हैं।

और पढ़े : धनोप माता मंदिर भीलबाड़ा के दर्शन की जानकारी

श्री चारभुजा नाथ मंदिर

श्री चारभुजा नाथ मंदिर
Image Credit : Ratan Lal Purbiya

भीलबाड़ा के राजसमंद में कोटड़ी तहसील में स्थित श्री चारभुजा नाथ का मंदिर भीलबाड़ा से सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। त्रिलोकीनाथ भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। जहाँ दूर-दूर श्रद्धालु भगवान विष्णु के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

चामुंडा माता का मंदिर

चामुंडा माता का मंदिर
Image Credit : Yashwant Kumar Basita

भीलबाड़ा के दर्शनीय स्थलों में शामिल चामुंडा माता का मंदिर हरणी महादेव की पहाड़ियों पर स्थित एक आकर्षित स्थान है । भीलवाड़ा शहर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चामुंडा माता के मंदिर से पर्यटक शहर का पूरा दृश्य देख सकते है।

करणी माता मंदिर बीकानेर

करणी माता मंदिर बीकानेर

राजस्थान के बीकानेर में करणी माता का मंदिर जग-प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैं। यह स्थान यहां रहने वाले चूहों की घनी आबादी के लिए जाना जाता हैं। बीकानेर का यह अभयारण्य देवी दुर्गा के अवतारों में से एक करणी माता को समर्पित है। इस मंदिर में लगभग 20,000 से अधिक चूहे हैं, जो इस परिसर में निवास करते हैं और निस्संदेह पर्यटकों के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। करणी माता के इस मंदिर को पत्थरों और संगमरमर से तराशा गया है। मंदिर में महाराजा गंगा सिंह द्वारा निर्मित करवाए गए चांदी के गेट लगे हुए हैं। पक्षियों की मार से चूहों की रक्षा के लिए एक लटकती हुयी जाली भी लगाई गयी हैं।

और पढ़े : बीकानेर के करणी माता मंदिर के दर्शन की जानकारी और पर्यटन स्थल

भांडासर जैन मंदिर बीकानेर

भांडासर जैन मंदिर बीकानेर

भांडासर जैन मंदिर बीकानेर शहर के दो प्रसिद्ध जैन मंदिरों में से एक है। भांडासर जैन मंदिर पीले पत्थरों की नक्काशी और दर्शनीय चित्रों के साथ सुसौभित है। मंदिर के आंतरिक भाग के स्तंभों और दीवारों पर बने चित्र इस मंदिर की खूबसूरती को परिभाषित करते है। दीवारों पर 24 जैन शिक्षकों को चित्रित किया गया हैं। यह मंदिर 16वीं शताब्दी के दौरान एक भंडसा ओसवाल नामक एक व्यापारी ने बनवाया था और यह मंदिर मूल रूप से पांचवे जैन तीर्थकर को समर्पित हैं।

लक्ष्मीनाथ नारायण मंदिर

लक्ष्मीनाथ नारायण मंदिर

राजस्थान के बीकानेर का श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर यहां के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित हैं मंदिर में स्थापित मूर्ति चांदी के नाजुक और जटिल कलाकृतियों से सुशोभित है।

और पढ़े : बीकानेर के श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर के दर्शन की जानकरी

जैन मंदिर नागौर

जैन मंदिर नागौर
Image Credit : Dharnendra Shiyal

जैन मंदिर काँच से निर्मित नागौर का एक प्रमुख  तीर्थस्थल है सुन्दर जैन मंदिर का निर्माण पुरी तरह से कांच से किया गया है। जो तीर्थ यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जो अन्य सभी जैन मंदिरों के बीच एक असाधारण मंदिर है। इस मंदिर में कलात्मक शिल्पकार वास्तव में जैन पवित्र ग्रंथों के पुराने कार्यों को चित्रित करता है और संगमरमर की कला ,बहुत सुंदर और विचित्र दृश्य प्रस्तुत करती है।

पशुपति नाथ मंदिर

राजस्थान में नागौर जिले के मंझवास गांव में स्थित पशुपति नाथ मंदिर नागौर के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, इस मंदिर को नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर के समान बनाया गया है। जहा तीर्थ यात्रियो की अपूर्ण आस्था देखने को मिलती है। इस मंदिर का निर्माण 1982 में योगी गणेशनाथ ने किया था। जहाँ पशुपति नाथ मंदिर में शिवरात्रि पर और श्रावण के महीने में श्रद्धालुयो की अधिक भीड़ देखी जा सकती है।

किराडू मंदिर बाड़मेर

किराडू मंदिर बाड़मेर
Image Credit : Gopala Rao Palla

किराडू मंदिर बाड़मेर से 35 किमी,थार रेगिस्तान के पास एक शहर में 5 मंदिर के पास स्थित हैं जिन्हें किराडू मंदिर कहा जाता है। यह सभी मंदिर वास्तुकला की अपनी सोलंकी शैली के लिए प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों में उल्लेखनीय और शानदार मूर्तियां हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं।

और पढ़े : बाड़मेर का किराडू मंदिर के दर्शन की जानकारी

श्री नाकोड़ा जैन मंदिर

श्री नाकोड़ा जैन मंदिर

श्री नाकोड़ा जैन मंदिर तीसरी शताब्दी में निर्मित एक प्राचीन मंदिर है जिसका कई बार जीर्णोद्धार किया गया है। 13 वीं शताब्दी में अलमशाह ने इस मंदिर पर आक्रमण किया और लूट लिया। लेकिन वो मंदिर की मूर्ति चोरी नहीं कर पाया क्योंकि वो यहां कुछ मील दूर गांव में छिपा दी गई थी। इसके बाद मूर्ति को वापस लाया गया और 15 वीं शताब्दी में मंदिर को पुनर्निर्मित किया गया।

और पढ़े : श्री नाकोड़ा जैन मंदिर के दर्शन की जानकारी

देवका सूर्य मंदिर

देवका सूर्य मंदिर
Image Credit : Vaghela Ashok

देव-सूर्य मंदिर का निर्माण 12 वीं या 13 वीं शताब्दी में किया गया था। बाड़मेर-जैसलमेर रोड के किनारे बाड़मेर से लगभग 62 किलोमीटर की दूरी पर देवका में स्थित इस मंदिर को अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यहां गाँव में दो अन्य मंदिरों और हैं जो कि खंडहर हैं। बता दें कि इन मंदिरों में भगवान गणेश की मूर्तियां हैं।

रानी भटियानी मंदिर

रानी भटियानी मंदिर
Image Credit : Arjun Singh

रानी भटियानी मंदिर जसोल में स्थित रानी भटियानी मंदिर में खास रूप से मंगियार बार्ड समुदाय द्वारा पूजा जाता है। क्योंकि इसके बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर ने एक मंगनियार को दिव्य दृष्टि दी है। कई लोग इस मंदिर की देवी को मजीसा या माँ के दर्भित करते हैं और उनके सम्मान में गीत भी गाते हैं। पौराणिक कथा की माने तो मंदिर की देवी एक राजपूत राजकुमारी थीं जिन्हें देवी बनने से पहले का स्वरूप कहा जाता था।

और पढ़े : जसोल के रानी भटियाणी मंदिर के दर्शन की जानकारी

सीताबाड़ी बारां

सीताबाड़ी
Image Credit : Mohan

बारां से 45 किमी दूर स्थित सीताबाड़ी एक प्रसिद्ध पूजा स्थल है। आपको बता दें कि इस पवित्र पूजा स्थल पर कई पर्यटक पिकनिक बनाने के लिए भी आते हैं। इस धार्मिक स्थल के बारे में कई लोगों का मानना है कि यहां पर भगवान राम और सीता के जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। सीताबाड़ी में कई कुंड स्थित हैं जिनमें वाल्मीकि कुंड, सीता कुंड, लक्ष्मण कुंड, सूर्य कुंड के नाम शामिल हैं। सीताबाड़ी में सीताबाड़ी मेले का आयोजन भी किया जाता है जिस दोरान पर्यटकों की भीड़ देखी जा सकती है।

ब्राह्मणी माता मंदिर

ब्राह्मणी माता मंदिर
Image Credit : Naveen Sharma

ब्राह्मणी माता मंदिर सोरांसन गांव में बारां से 20 किमी की दूरी पर स्थित है। बता दें कि इस मंदिर को सोरसन माताजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है ब्राह्मणी माता मंदिर में एक विशेष तेल का दीपक लगा हुआ है जिसको अखंड ज्योत कहते हैं। इस दीपक के बारे में यह कहा जाता है कि यह दीपक पूरे 400 वर्षों से निर्बाध रूप से जल रहा है। मंदिर परिसर में हर साल शिव रात्रि के खास मौके पर एक मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें हर साल कई हजार श्रद्धालु शामिल होते है।

और पढ़े : बारां के ब्राह्मणी माता मंदिर के दर्शन की जानकारी

दिलवाड़ा जैन मंदिर माउंट आबू

दिलवाड़ा जैन मंदिर माउंट आबू

दिलवाड़ा जैन मंदिर राजस्थान की अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित जैनियों का सबसे लोकप्रिय और सुंदर तीर्थ स्थल है। इस मंदिर का निर्माण 11 वीं और 13 वीं शताब्दी के बीच वास्तुपाल और तेजपाल ने किया था। दिलवाड़ा मंदिर अपनी जटिल नक्काशी और हर से संगमरमर की संरचना होने की वजह से प्रसिद्ध है। यह मंदिर बाहर से बहुत ही साधारण दिखाई देता है लेकिन जब आप इस मंदिर को अंदर से देखेंगे तो इसकी छत, दीवारों, मेहराबों और स्तंभों पर बनी हुई डिजाइनों को देखते ही आकर्षित हो जायेंगे। जैनियों का तीर्थ स्थल होने के साथ ही यह मंदिर एक संगमरमर से बनी एक ऐसी जादुई संरचना है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।

और पढ़े : दिलवाड़ा जैन मंदिर माउंट आबू की पूरी जानकारी

अर्बुदा देवी मंदिर माउंट आबू

अर्बुदा देवी मंदिर माउंट आबू

अर्बुदा देवी मंदिर को माउंट आबूका सबसे पवित्र तीर्थ बिंदु माना जाता है। इस मंदिर को 51 में से छठा शक्तिपीठ माना जाता है। अर्बुदा देवी को कात्यायनी देवी का अवतार कहा जाता है। नवरात्र के मौके पर माउंट आबू का पर्यटन स्थान एक आध्यात्मिक नगरी के रूप में बदल जाता है। यहाँ पर दूर से लोग अर्बुदा देवी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। आपको बता दें कि यह मंदिर एक गुफा के अंदर स्थित है जिसके दर्शन के लिए आपको 365 सीढ़ियां चढ़कर जाना होता है। विशाल ठोस चट्टानों से निर्मित यह मंदिर भारत के चट्टानों पर बने मंदिरों के सर्वश्रेष्ठ नमूनों में से एक है।

और पढ़े : अर्बुदा देवी मंदिर का इतिहास और पौराणिक कथा

हर्षत माता मंदिर

हर्षत माता मंदिर

दोसा जिले में स्थित हर्षत माता का मंदिर दोसा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो पर्यटकों और भक्तों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यह मंदिर स्थानीय देवी हर्षत माता को समर्पित है।  पुराने समय में इस मंदिर ने आक्रमणकारियों के प्रकोपों का सामना किया है। और इस मंदिर को इस्लामिक शासकों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। अब यहां पर सिर्फ खंडर ही बचें हुए हैं। यहाँ पर आप एक भव्य खुले आंगन में स्तंभों और दीवारों पर नक्काशी के साथ अदभुद मूर्तियों को देख सकते हैं। इस मंदिर की वर्तमान सुंदरता देख कर कोई भी पुराने समय में मंदिर की महिमा का अंदाजा लगा सकता है। यहाँ तीन दिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन भी किया जाता है। जो तीर्थ यात्रियों के लिए लोकप्रिय माना जाता है। आपको बता दें कि यह मंदिर यहां आने वाले पर्यटकों को बिलकुल निराश नहीं करता। मंदिर और इसके आसपास की प्राकृतिक सुंदरता देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो सकता है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर
Image Credit : Rohit Mogha

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के दौसा जिले में स्थित एक हिंदू मंदिर है। जो हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर भारत में इतना लोकप्रिय कि हर साल दूर-दूर से इस मंदिर में तीर्थ यात्रियों का आना जाना लगा रहता है। हनुमान जी को ही बालाजी के रूप में भी जाना जाता है और उनके मंदिर के सामने सियाराम को समर्पित एक मंदिर भी स्थित है जिसमें सियाराम की एक सुंदर मूर्ति है।  मंदिर में शनिवार और मंगलवार को भीड़ काफी ज्यादा होती है क्योंकि यह बालाजी के सबसे खास दिन होते हैं। अगर आप दौसा घूमने के लिए जा रहें हैं तो कुछ समय मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के दर्शन करने के लिए भी निकाल लें। क्योंकि बालाजी मंदिर के दर्शन करना सौभाग्य माना जाता है।

और पढ़े : मेहंदीपुर बालाजी का इतिहास और दर्शन की पूरी जानकारी

सालासर बालाजी मंदिर चुरू

सालासर बालाजी मंदिर चुरू
Image Credit : Aakash Omar

सालासर बालाजी या सालासर धाम एक मंदिर है जो राजस्थान के चुरू जिले के सुजानगढ़ के पास सालासर के छोटे से शहर में स्थित है। बता दें कि यह मंदिर बालाजी को समर्पित है जो कि हनुमान का एक नाम है। सालासर बालाजी मंदिर का निर्माण वर्ष 1754 में किया गया था, जिसे आज बेहद पवित्र स्थल माना जाता है। और इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि यहां पर भक्तों कि हर मनोकामना पूरी होती है। जो साल भर भारी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है।

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