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Kedarnath Temple In Hindi, केदारनाथ मंदिर, भारत के उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में गढ़वाल हिमालय पर्वतमाला पर स्थित सबसे प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है। केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड में ‘छोटा चार धाम यात्रा’ का एक हिस्सा है। यह मंदिर 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जो देश की 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचा है और भगवान शिव को समर्पित है। केदारनाथ मंदिर अपने सामने बहने वाली मंदाकिनी नदी के साथ बर्फ से ढके और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित होने की वजह से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी तरफ आकर्षित करता है। वर्तमान केदारनाथ मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया है और इसे मूल रूप से पांडवों द्वारा हजार साल पहले एक बड़े आयताकार ढाले पर विशाल पत्थर की पटियों से बनाया गया था। केदार भगवान शिव का एक और नाम है जिसका मतलब होता है रक्षक और विध्वंसक। केदारनाथ शिव को समर्पित सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की यात्रा करने से भक्तों के मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। अगर आप केदारनाथ मंदिर के बारे में अन्य जानकारी चाहते हैं तो इस लेख को जरुर पढ़ें यहां हम आपको केदारनाथ मंदिर के इतिहास, वास्तुकला, मंदिर खुलने और बंद होने के समय और आरती की पूरी जानकारी दे रहें हैं।

1. केदारनाथ मंदिर का इतिहास और कहानी – Kedarnath Mandir Ki History Aur Kahani In Hindi

केदारनाथ मंदिर का इतिहास और कहानी

केदारनाथ मंदिर के पीछे का इतिहास बहुत दिलचस्प है क्योंकि यह महाभारत की पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। पांडवों ने कुरुक्षेत्र की लड़ाई में अपने चचेरे भाइयों कौरवों को मारने के बाद अपने आप को दोषी महसूस किया था। इसलिए वे चाहते थे कि भगवान शिव उन्हें पापों से मुक्ति दें, लेकिन शिव उनसे नाराज थे। शिव को प्रसन्न करने के लिए पांडव सबसे पहले काशी गए जहां जाने के बाद उन्हें पता चला कि शिव हिमालय में हैं। इसके बाद पांडव हिमालय के लिए भी आगे बढ़े लेकिन शिव उन्हें पापों से आसानी से मुक्त नहीं करना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने खुद को भैंस के रूप में बदल किया और गुप्तकाशी चले गए। इसके पांडव गुप्तकाशी भी पहुँचे और एक अनोखी दिखने वाली भैंस को देखा। पांडवों में से एक भीम ने भैंस की पूंछ पकड़ ली और भैंस अलग-अलग दिशाओं में बिखर गई। ऐसा माना जाता है कि इसका कूब केदारनाथ में गिरा था और इसके बाद केदारनाथ मंदिर का जन्म हुआ। इसके साथ ही भैंस के शरीर के दूसरे हिस्से तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर और मध्यमहेश्वर जैसे स्थानों पर गिरे थे। केदारनाथ के साथ इन चार स्थानों को ‘पंच केदार’ के रूप में जाना जाता है। इसके बाद भगवान शिव ने पांडवों के पापों को माफ कर दिया और ज्योतिर्लिंग के रूप में केदारनाथ में निवास करने का फैसला किया।

वैसे केदारानाथ मङ्क्षदर का इतिहास बहुत गौरवशाली है। इसके इतिहास से कई कथाएं जुड़ी हैं। बताया जाता है कि हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी सच्ची अराधना देखकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनकी प्रार्थना को स्वीकार करते हुए ज्योर्तिलिंग में हमेशा यहां वास करने का उन्हें वरदान दिया।

2. केदारनाथ मंदिर की वास्तुकला – Kedarnath Temple Architecture In Hindi

केदारनाथ मंदिर की वास्तुकला -

केदारनाथ मंदिर वास्तुकला का आकर्षक व अद्भुत नमूना है। केदारानाथ मंदिर की जितनी मान्यता है इसकी कारीगरी उतनी ही देखने लायक है। यह मंदिर छह फीट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। ये मंदिर असलार शैली में बना हुआ है, जिसमें पत्थर स्लैब या सीमेंट के बिना ही एकदूसरे में इंटरलॉक्ड हैं। महाभारत में भी मंदिर क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। मंदिर में एक गर्भगृह है। इस गर्भ गृह में नुकीली चट्टान भगवान शिव के सदाशिव रूप में पूजी जाती है। बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान है। मंदिर के पीछे कई कुंड बने हुए हैं, जिनमें आचमन और तर्पण किया जा सकता है।

और पढ़े: केदारनाथ का इतिहास, जाने से पहले जरूर जान लें ये बातें 

3. केदारनाथ मंदिर के खुलने और बंद होने की तारीखें 2019 – Kedarnath Temple Opening Date 2019 In Hindi

केदारनाथ मंदिर के कपाट 9 मई 2019 को सुबह 5:35 बजे से यत्रियों और भक्तों के लिए खुले हुए हैं।

4. केदारनाथ मंदिर को जाने वाला रास्ता – Kedarnath Trek In Hindi

केदारनाथ मंदिर को जाने वाला रास्ता

अगर आप केदारनाथ मंदिर की यात्रा करने की योजना बना रहें हैं तो आपको बता दें कि गौरीकुंड से 16 किलोमीटर लंबे ट्रेक के बाद आप केदारनाथ पहुंच सकते हैं। इन खड़े रास्तों पर चढ़ने के लिए घोड़े या टट्टू उपलब्ध हैं। हालांकि 2013 की बाढ़ ने केदारनाथ को तबाह कर दिया था लेकिन इसका गौरव को फिर से प्राप्त करने के लिए काम किया जा रहा है। बता दें कि केदारनाथ की ट्रैकिंग का रास्ता अब थोड़ा अलग है। नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग ने थोड़े- थोड़े किलोमीटर पर शेड बनाए हैं जहां श्रद्धालु इस कठिन ट्रेक के दौरान आराम कर सकते हैं।

5. केदारनाथ मंदिर में दर्शन करने का समय – Kedarnath Temple Darshan Timings In Hindiकेदारनाथ मंदिर में दर्शन करने का समय

केदारनाथ के मंदिर के द्वार दर्शनार्थियों के लिए सुबह 6 बजे खोल दिए जाते हैं। जिसके लिए रात से ही लंबी लाइन लगना शुरू हो जाती है। दोपहर तीन से पांच बजे तक विशेष पूजा की जाती है, जिसके बाद मंदिर बंद हो जाता है। पांच बजे फिर मंदिर दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। इसके थोड़ी देर बाद भगवान शिव का श्रृंगार होता है, जिस दौरान कपाट थोड़ी देर के लिए बंद कर दिए जाते हैं। फिर 7:30 से 8:30 तक आरती होती है। बता दें कि भगवान शिव की ये मूर्ति पांच मुख वाली होती है।

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6. केदारनाथ मंदिर में होने वाली पूजा और अनुष्ठान – Kedarnath Temple Pooja And Rituals In Hindi

केदारनाथ मंदिर में होने वाली पूजा और अनुष्ठान

अगर आप कभी केदारनाथ यात्रा पर जाएं तो ध्यान रखें कि ये मंदिर रात 8:30 बजे बंद हो जाता है। यहां आरती के लिए मंत्र कन्नड़ भाषा में बोले जाते हैं। पूजा अनुष्ठानों की श्रृंखला में महाभिषेक, रूद्राभिषेक, लघु रूद्राभिषेक और शोदाशोपचार पूजा, शिव सहश्रमणम पथ, शिव महिमा स्त्रोतपथ और शाम को शिव तांडव स्त्रोत मार्ग की परंपरा निभाई जाती है। शाम को महाभिषेक पूजा शाम 4 से 7 बजे के बीच की जाती है।केदारनाथ मंदिर में सुबह और शाम विभिन्न प्रकार की पूजा होती है, जो पूरे दिन की जाती है। भक्तों को एक विशेष पूजा में भाग लेने के लिए एक विशिष्ट राशि का भुगतान करना पड़ता है। सुबह की पूजा 4:00 बजे से शुरू होती है और 7:00 बजे तक चलती है।

6.1 महाभिषेक – Mahabhishek

इस पूजा में शामिल होने की लागत प्रति व्यक्ति 1700 रूपये है।

6.2 रुद्राभिषेक – Rudrabhishek

पूजा भगवान शिव को समर्पित है और भक्तों के सभी पापों को खत्म करने के लिए यह पूजा की जाती है। इस पूजा में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति 1300 रूपये खर्च होते हैं।

6.3 लघुरुद्रभिषेक – Laghurudrabhishek

यह अभिषेक स्वास्थ्य और धन से संबंधित परेशानी को दूर करने या कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है। इस पूजा में एक व्यक्ति की लागत 1100 रूपये है।

6.4 षोडसोपचार पूजा – Shodasopachar Pooja

इस पूजा में शामिल होने के लिए प्रत्येक भक्त को 1000 रूपये देने होते हैं। इनके अलावा सुबह पूजा और कई अन्य अनुष्ठान भी किए जाते हैं, जिनमें भक्त नाममात्र दरों पर उपस्थित हो सकते हैं।

6.5 शिव सहस्रनाम पाठ – Shiva Sahasranamam Paath

इस पूजा में भगवान शिव के सामने भगवान शिव के सभी 1008 नामों का पाठ किया जाता है और उचित पूजा व अभिषेक किया जाता है। इस पूजा में शामिल होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति 360 रूपये लिए जाते हैं।

6.6 शिव महिम्स्तोत्र पाठ – Shiva Mahimastotra Paath

भक्तों को इस पूजा में हिस्सा लेने के लिए प्रति व्यक्ति 360 रूपये का भुगतान करना होता होता है।

6.7 शिव थंडवस्तोत्र पाठ – Shiva Thandavastotra Paath

इन स्तोत्रों में प्रति स्तोत्र में 16 अक्षर होते हैं, वे भगवान शिव की शक्ति और सुंदरता का वर्णन करते हैं। इसमें शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति 340 रूपये चार्ज है।

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7. केदारानाथ मंदिर के आसपास घूमने लायक खुबसूरत पर्यटन और आकर्षण स्थल – Places To Visit Near Kedarnath Temple In Hindi

केदारानाथ मंदिर के आसपास घूमने लायक खुबसूरत पर्यटन और आकर्षण स्थल

7.1 वासुकी ताल

वासुकीताल एक खूबसूरत झील है, जिसकी केदारानाथ से दूरी महज 8 किमी है। यहां आने वाले यात्री झील के पास स्थित चौखंभा चोटी का भरपूर आनदं ले सकते हैं।

7.2 शंकराचार्य समाधि

शंकराचार्य समाधि

Image Credit: Buddha Ghosh

आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि केदारानाथ के पास ही स्थिति है। इसलिए यहां जाने वाले लोग उनकी समाधि पर जरूर जाते हैं। वो शंकराचार्य कही थे जिन्होंने 8वीं शताब्दी में केदारानाथ मंदिर का पुर्ननिर्माण कराया और चारों मठों की स्थापना की।

7.3 अगस्त्यमुनि

अगस्त्यमुनि

Image Credit: Dijoraj Mukherjee

हिंदू मुनि अगस्त्य ऋषि का घर मानी जाती है ये जगह। ये 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है।

7.4 चंद्रशिला

चंद्रशिला

यह 3679 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ट्रेकिंग करने के लिए काफी अच्छी जगह है। लेकिन दिसंबर से जनवरी में बफ पडऩे के कारण यहां ट्रेकिंग रोक दी जाती है। पहली बार ट्रेकिंग करने वाले लोगों के लिए ये जगह अच्छा अनुभव है।

7.5 सोनप्रयाग

सोनप्रयाग केदारानाथ के पास 19 किमी की दूरी पर स्थित है। इसकी ऊंचाई1829 किमी है। यह वही जगह है कि जहां बासुकी और मंदाकिनी नदी आपस में मिलती हैं।

7.6 केदारगिरीपिंड

ये वही जगह है जहां से कई मंदाकिनी जैसी कई हिमनदियां बहती हैं। केदार गिरीपिंड केदारनाथ, केदारनाथ गुंबद और भारतेकुन्था नम के पहाड़ों से मिलकर बना है।

7.7 गौरीकुंड

गौरीकुंड

गौरीकुंड केदारानाथ के पास एक छोटा सा गांव है बताया जाता है कि ये वही जगह है जहां भगवान शिव को पाने के लिए देवी पार्वती ने घोर तपस्या की थी। ये 1972 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर गौरीकुंड नाम का पानी का सोता है, जिसे पीकर कई बीमारियां दूर हो जाती है।

और पढ़े: ऋषिकेश में घूमने वाली जगह और पर्यटन स्थल 

8. केदारनाथ मंदिर में मनाये जाने वाले उत्सव – Festivals Celebration In Kedarnath Temple In Hindi

अगर आप भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के अलावा मंदिर में होने वाले रोमांचक और धार्मिक उत्सवों में शामिल होना हैं तो हम आपको केदारनाथ मंदिर में मनाये जाने वाले उत्सवों के बारे में बताने जा रहें हैं।

8.1 बद्री-केदार उत्सव – Badri-Kedar Utsav

बद्री-केदार उत्सव

केदारनाथ में बद्री-केदार उत्सव जून के महीने में आयोजित किया जाता है, यह त्यौहार भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है और यह पूरे उत्तरांचल के प्रमुख कलाकारों को एक साथ अपनी संगीत प्रतिभा दिखाने का मौका देता है । यह त्यौहार 8 दिनों तक मनाया जाता है।

8.2 श्रावणी अन्नकूट मेला – Shravani Annakoot Mela

श्रावणी अन्नकूट मेला

श्रावणी अन्नकूट मेला रक्षा बंधन के एक दिन पहले आयोजित किया जाता है। इस उत्सव के दौरान पूरा ज्योतिर्लिंग पके हुए चावल से ढका हुआ है जिसे बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस शुभ मौके पर कई पूजाएँ की जाती हैं।

8.3 समाधि पूजा – Samadhi Pooja

समाधि पूजा हर साल श्री आदि शंकराचार्य की समाधि पर आयोजित की जाती है। यह आयोजन उस दिन होता है जब केदारनाथ मंदिर छह महीने के लिए बंद हो जाता है।

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9. केदारनाथ मंदिर की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Kedarnath In Hindi

केदारनाथ मंदिर की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय

Image Credit: Aswin Raman

केदारनाथ वर्ष के अधिकांश भाग में ठंडा रहता है, हालांकि, केदारनाथ की यात्रा के लिए मई से जून और सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा है। इसका मतलब यह है कि अपनी यात्रा की योजना बनाते समय सर्दियों के मौसम को टालना एक अच्छा निर्णय हो सकता है। सर्दियों में नवंबर से अप्रैल तक भारी वर्षा के साथ शून्य से नीचे तापमान तक पहुंच जाता है। समरटाइम (मई-जून) केदारनाथ और आसपास के अन्य स्थलों के लिए आदर्श। मानसून जुलाई से अगस्त तक रहता है और भारी वर्षा लाता है, जिससे भूस्खलन और यात्रा में बाधा उत्पन्न होती है।

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10. केदारानाथ मंदिर कैसे जाये – How To Reach Kedarnath Temple In Hindi

केदारानाथ आप ट्रेन से जा सकते हैं। ऋषिकेश केदारनाथ के सबसे पास रेलवे स्टेशन है जिसके बीच की दूरी 216 किमी है। ऋषिकेश से गौरीकुंड पहुंचने के लिए आप टैक्सी या बस की सर्विस ले सकते हैं। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच की दूरी मात्र 5 किमी है। यहां सड़क खत्म हो जाती है। 2013 में आई बाढ़ के खतरनाक हादसे के बाद सरकार ने रामबाढ़ा के बाद एक नया ट्रेङ्क्षकग रूट तैयार कर दिया है। नए ट्रेक से आप जाएंगे तो गौरीकुंड से केदारनाथ की दूरी 16 किमी है। 2016 में केदारनाथ तक जाने के लिए दो ट्रैक और तैयार किए हैं। जिसमें से पहला चौमासी से होते हुए खाम, फिर रामबाड़ा और फिर केदारनाथ पहुंचने का है। इस रूट की कुल दूरी18 किमी है। वहीं दूसरा रास्ता त्रिजुगीनारायण से केदारानाथ जाने का है, जिसके बीच की दूरी 15 किमी है।

10.1 सड़क मार्ग से केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Kedarnath Temple By Road In Hindi

सड़क मार्ग से केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे

राष्ट्रीय राजमार्ग 109 रुद्रप्रयाग और केदारनाथ को जोड़ता है, गौरीकुंड आसपास के सभी शहरों जैसे ऋषिकेश, चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, श्रीनगर, टिहरी आदि से सड़क के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट से श्रीनगर और ऋषिकेश तक बस ले सकते हैं। उत्तराखंड के प्रमुख स्थलों से टैक्सी और बसें भी ली जा सकती हैं।

10.2 ट्रेन से केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Kedarnath Temple By Train In Hindi

 ट्रेन से केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे

बद्रीनाथ से निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जो केदारनाथ से 216 किमी दूर है। यह भारत में प्रमुख स्थलों के लिए कई लगातार ट्रेनों से जुड़ा हुआ है। आपको टैक्सी या बसों के माध्यम से रेलवे स्टेशन से गौरीकुंड तक पहुँच सकते हैं।

10.3 फ्लाइट से केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Kedarnath Temple By Flight In Hindi

फ्लाइट से केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे

गौरीकुंड के लिए निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जहाँ से आप गौरीकुंड के लिए टैक्सी ले सकते हैं। गौरीकुंड से केदारनाथ पहुँचने के लिए आपको 16 किलोमीटर तक ट्रेकिंग करने होगी जिसमें आप घोड़े / पालकी की सवारी भी कर सकते हैं। अगर आप ट्रेकिंग नहीं करना चाहते तो देहरादून में उपलब्ध हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

और पढ़े: गंगोत्री धाम की यात्रा और प्रमुख पर्यटन स्थल की जानकारी 

11. केदारनाथ मंदिर का नक्शा – Kedarnath Temple Map

12. केदारनाथ मंदिर की फोटो गैलरी – Kedarnath Temple Images

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