चंडी देवी मंदिर का इतिहास – Chandi Devi Temple Haridwar In Hindi

Chandi Devi Temple In Hindi चंडी देवी मंदिर उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार में स्थित है। चंडी देवी का मंदिर हिंदुओं का एक प्रसिद्ध मंदिर है। चंडी देवी मंदिर हिमालय की सबसे दक्षिणी पर्वत श्रृंखला शिवालिक पहाड़ियों के पूर्वी शिखर पर नील पर्वत के ऊपर स्थित है। यह मंदिर हरिद्वार के भीतर स्थित पंच तीर्थ (पांच तीर्थ) में से एक है। चंडी देवी मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में अत्यधिक पूजनीय है। माना जाता है कि यह एक ऐसा स्थल है जहाँ मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। जिसके कारण देश के कोने कोने से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर देवी के दरबार में आते हैं। यह हरिद्वार में स्थित तीन पीठों में से एक है, अन्य दो पीठ मनसा देवी मंदिर और माया देवी मंदिर हैं।

  1. चंडी देवी मंदिर का इतिहास – Chandi Devi Haridwar History In Hindi
  2. चंडी देवी मंदिर से जुड़ी कथा – Story About Chandi Devi Temple In Hindi
  3. चंडी देवी मंदिर के बारे में रोचक तथ्य – Chandi Devi Temple Interesting Facts In Hindi
  4. चंडी देवी मंदिर में पूजा का समय – Chandi Devi Pooja Timing In Hindi
  5. चंडी देवी मंदिर दर्शन के लिए बेहतर समय – Best Time To Visit Chandi Devi In Hindi
  6. चंडी देवी मंदिर के आस-पास घूमने के स्थान – Places To Visit Near Chandi Devi Temple In Hindi
  7. चंडी देवी मंदिर का लोकेशन – Chandi Devi Temple Location In Hindi
  8. चंडी देवी मंदिर कैसे पहुंचें – How To Reach Chandi Devi Temple In Hindi
  9. चंडी देवी के फोटो – Chandi Devi Photo Gallery

1. चंडी देवी मंदिर का इतिहास – Chandi Devi Haridwar History In Hindi

माना जाता है कि चंडी देवी मंदिर का निर्माण 1929 में कश्मीर के राजा सुच्चत सिंह ने कराया था। लेकिन इसके साथ ही लोगों का यह भी मानना है कि मंदिर में मौजूद मूर्ति 8 वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी। शंकराचार्य हिंदू धर्म के सबसे महान पुजारियों में से एक थे। मंदिर को नील पर्वत के तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है जो हरिद्वार के भीतर स्थित पांच तीर्थों में से एक है।

2. चंडी देवी मंदिर से जुड़ी कथा – Story About Chandi Devi Temple In Hindi

चंडी देवी मंदिर से जुड़ी कथा - Story About Chandi Devi Temple In Hindi

देवी चंडी को चंडिका के रूप में भी जाना जाता है, जो इस मंदिर की प्रमुख देवी हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार बहुत समय पहले शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों ने स्वर्ग के देवता इंद्र के राज्य पर कब्जा कर लिया था और देवताओं को स्वर्ग से फेंक दिया था। देवताओं द्वारा गहरी प्रार्थना के बाद पार्वती ने चंडी के रूप को धारण किया और राक्षसों के सामने प्रकट हुईं। उस असाधारण महिला की सुंदरता से चकित होकर शुंभ ने उनसे शादी करने की इच्छा जताई। इनकार किए जाने पर, शुंभ ने अपने राक्षस प्रमुख चंदा और मुंडा को उसे मारने के लिए भेजा। लेकिन वे देवी चामुंडा द्वारा मारे गए। फिर शुंभ और निशुंभ ने मिलकर चंडिका को मारने की कोशिश की, लेकिन देवी के हाथों दोनों राक्षस मारे गए। इसके बाद चंडिका ने नील पर्वत के ऊपर थोड़ी देर आराम किया था। माना जाता है कि इसी स्थान पर बाद में एक मंदिर बनाया गया। इसके अलावा पर्वत श्रृंखला में स्थित दो चोटियों को शुंभ और निशुंभ कहा जाता है।

3. चंडी देवी मंदिर के बारे में रोचक तथ्य – Chandi Devi Temple Interesting Facts In Hindi

  • माना जाता है कि चंडी देवी मंदिर की विशेषता ही उसे खास बनाती है जिसके कारण दूर दूर से श्रद्धालु ऊंचे पर्वत पर स्थित इस मंदिर को देखने आते हैं।
  • आपको बता दें कि चंडी देवी को काली देवी की तरह माना जाता है और प्रायः इनके उग्र रूप की पूजा की जाती है।
  • अश्विन और चैत्र मास की की शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्र में चण्डी पूजा विशेष समारोह के द्वारा मनायी जाती है।
  • पूजा के लिये ब्राह्मण के द्वारा मन्दिर के मध्य स्थान को गोबर और मिट्टी से लीप कर मिट्टी के एक कलश की स्थापना की जाती है।
  • हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु चंडी देवी मंदिर में देवी का आशीर्वाद लेने के लिए जरूर आते हैं।
  • चंडीदेवी मंदिर के पास, हनुमानजी की माता अंजना का मंदिर स्थित है और चंडी देवी मंदिर में आने वाले भक्त इस मंदिर भी जरूर जाते हैं।
  • मनसा और चंडी, देवी पार्वती के दो रूप हमेशा एक दूसरे के करीब रहती हैं। मनसा का मंदिर बिल्व पर्वत पर गंगा नदी के विपरीत तट पर दूसरी ओर है।
  • चूंकि चंडी देवी का मंदिर मन्नतें पूरी करने के लिए जाना जाता है यही कारण है कि अन्य मंदिरों की अपेक्षा इस मंदिर में भारी भीड़ जुटती है।
  • पर्वत पर स्थित यह मंदिर अपनी लोकप्रियता के साथ ही पहाड़ के मनोरम दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है।

4. चंडी देवी मंदिर में पूजा का समय – Chandi Devi Pooja Timing In Hindi

चंडी देवी मंदिर का संचालन महंत द्वारा किया जाता है जो मंदिर के पीठासीन हैं। यह मंदिर सुबह पांच बजे के बाद खुलता है और रात में 8 बजे बंद होता है। मंदिर खुलने के बाद यहां सबसे पहले सुबह साढ़े पांच बजे चंडी देवी की आरती की जाती है। सुबह की आरती के बाद दिन भर पूजा पाठ और दर्शन का कार्य चलता रहता है।

5. चंडी देवी मंदिर दर्शन के लिए बेहतर समय – Best Time To Visit Chandi Devi In Hindi

चंडी देवी मंदिर दर्शन के लिए बेहतर समय - Best Time To Visit Chandi Devi In Hindi

अगर आप चंडी देवी मंदिर के दर्शन की योजना बना रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फरवरी से अक्टूबर के बीच यहां जाना अधिक सुविधाजनक होता है। चूंकि उत्तराखंड पर्वतीय इलाका है। इन महीनों में यहां ज्यादा बर्फबारी भी नहीं होती है और ना ही मंदिर जाने का रास्ता ब्लॉक होता है। इसलिए आप सर्दियां शुरू होने से पहले या खत्म होने के बाद और बरसात का मौसम शुरू होने से पहले चंडी देवी मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं।

6. चंडी देवी मंदिर के आस-पास घूमने के स्थान – Places To Visit Near Chandi Devi Temple In Hindi

चंडी देवी मंदिर के पास कई और मंदिर है, गौरी शंकर मंदिर, काली मंदिर, नीलेश्वर मंदिर, मनसा देवी मंदिर और दक्ष मंदिर जहां चंडी देवी मंदिर से कार या बस से भी जा सकते हैं। दोनों के लिए एक साथ टिकट खरीदना संभव है। आप पैदल या रिक्शा से भी हर की पौड़ी की यात्रा कर सकते हैं। चूंकि सभी मंदिरें आसपास हैं इसलिए चंडी देवी मंदिर के साथ इन मंदिरों के दर्शन करना लाभकारी माना जाता है।

7. चंडी देवी मंदिर का लोकेशन – Chandi Devi Temple Location In Hindi

यह मंदिर हरिद्वार से 6 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर बसा है। चंडी देवी मंदिर हर की पौड़ी से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर तक पहुँचने के लिए या तो चंडीघाट से तीन किलोमीटर ट्रेकिंग मार्ग से आना पड़ता है और कई चरणों की चढ़ाई करके या हाल ही में शुरू की गई रोप-वे (केबल कार) पर चढ़कर मंदिर तक पहुँचते हैं। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए चंडी देवी उड़नखटोला के नाम से जानी जाने वाली रोप-वे सेवा की शुरुआत की गई है और यह तीर्थयात्रियों को निकटवर्ती मनसा देवी मंदिर में भी पहुंचाती है। रोप-वे नाज़ियाबाद रोड पर गौरी शंकर मंदिर के पास स्थित निचले स्टेशन से तीर्थयात्रियों को 2,900 मीटर (9,500 फीट) की ऊँचाई पर स्थित चंडी देवी मंदिर तक ले जाता है। रोपवे मार्ग की कुल लंबाई लगभग 740 मीटर (2,430 फीट) और ऊंचाई 208 मीटर (682 फीट) है। पहाड़ी के दूसरी ओर घने जंगल हैं और रोपवे गंगा नदी और हरिद्वार के सुंदर दृश्य को दर्शाता है।

8. चंडी देवी मंदिर कैसे पहुंचें – How To Reach Chandi Devi Temple In Hindi

चंडी देवी मंदिर हरिद्वार से 6 किलोमीटर, ऋषिकेश से 30 किलोमीटर, दिल्ली से 215 किमी, देहरादून से 60 किमी, जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून से 35 किमी, मसूरी से 95 किमी दूर है। यदि आप हवाई जहाज से आना चाहते हैं तो आप देहरादून एयरपोर्ट आ सकते हैं फिर वहां से टैक्सी या बस द्वारा हरिद्वार पहुंचकर चंडी देवी मंदिर जा सकते हैं।

यदि आप बस से आना चाहते हैं तो दिल्ली, देहरादून और ऋषिकेश से बसें आती हैं। आप हरिद्वार पहुंचकर वहां से चंडी देवी मंदिर जा सकते हैं।

ट्रेन से आप हरिद्वार स्टेशन पहुंच सकते हैं फिर वहां से चंडी देवी मंदिर जा सकते हैं।

आपको बता दें कि हरिद्वार से चंडी देवी मंदिर पहुंचने में लगभग एक घंटा लगता हैं। यदि आप पैदल नहीं चलना चाहते हैं तो रोपवे से पांच से दस मिनट में मंदिर पहुंच सकते हैं।

और पढ़े: हरिद्वार में घूमने की जगह और दर्शनीय स्थल की जानकारी – Haridwar Tourist Places In Hindi

9. चंडी देवी के फोटो – Chandi Devi Photo Gallery

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