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hindustan ke dharmik sthal

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Jageshwar Dham In Hindi, जागेश्वर मंदिर जिसको जागेश्वर घाटी मंदिर भी कहा जाता है जो भारत में उतराखंड राज्य के अल्मोड़ा के पास 7 वीं और 12 वीं शताब्दी के बीच निर्मित 100 से अधिक हिंदू मंदिरों का एक समूह है। जागेश्वर मंदिर यहां के 124 मंदिरों में से सबसे बड़ा मंदिर जो पर्यटकों और तीर्थयात्रियों द्वारा सबसे ज्यादा देखा जाता है। बता दें कि जागेश्वर मंदिर जटागंगा घाटी पर स्थित है जिसका निर्माण 9 वीं शताब्दी में हुआ था। अगर आप भारत की संस्कृति को गहराई से जानना चाहते हैं और पौराणिक मान्यताओं की खोज करने में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह जगह आपके लिए स्वर्ग के सामान है। जागेश्वर में स्थित ज्यादातर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जबकि अन्य पास के मंदिर भगवान विष्णु, शक्ति देवी और हिंदू धर्म के कई देवी-देवताओं को समर्पित हैं। अगर आप जागेश्वर धाम जाने की योजना बना रहे हैं या जाना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को जरुर पढ़ें, जिसमें हमने जागेश्वर धाम के बारे में विस्तार से बताया है।

Chamunda Devi Temple Himachal Pradesh In Hindi चामुंडा देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश राज्य के चंबा जिले में स्थित एक प्रचीन मंदिर और एक प्रमुख आकर्षक स्थल है। चामुंडा देवी मंदिर का निर्माण वर्ष 1762 में उमेद सिंह ने करवाया था। पाटीदार और लाहला के जंगल स्थित यह मंदिर पूरी तरह से लकड़ी से बना हुआ है। बानेर नदी के तट पर स्थित यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, जिन्हें युद्ध की देवी के रूप में जाना जाता है। पहले इस जगह पर सिर्फ पत्थर के रास्ते कटे हुए थे, लेकिन अब इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आपको 400 सीढ़ियों को चढ़कर जाना होगा। एक अन्य विकल्प के तौर पर आप चंबा से 3 किलोमीटर लंबी कंक्रीट सड़क के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

चामुंडा देवी मंदिर करीब सात सौ साल पुराना है जिसके पीछे की तरफ से गुफा जैसी संरचना है जिसको भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। चामुंडा देवी मंदिर को चामुंडा नंदिकेश्वर धाम के रूप में भी जाना जाता है जिसमें भगवान शिव और शक्ति का घर है। भगवान हनुमान और भैरव इस मंदिर के सामने वाले द्वार की रक्षा करते हैं और इन्हें देवी का रक्षक माना जाता है।

मुंबई में स्थित सिद्दिविनायक मंदिर भारत में श्री गणेश के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान है जिसकी वजह से देश-विदेश से लोग श्री गणेश भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में भगवान गणेश की एक मूर्ति स्थापित है जिसके पीछे एक बहुत खास कहानी है। इस मंदिर का नाम सिद्दिविनायक इसलिए पड़ा क्योंकि इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति की सूड दाई ओर मुड़ी होती हैं और सिद्धि पीठ से जुड़ी है। भगवान के शरीर से ही इस मंदिर का नाम सिद्दिविनायक हुआ है। इस मंदिर में आने वाले भक्तों को गणेश के ऊपर अटूट विश्वास होता है उनका मानना है कि भगवान उनकी मनोकामना पूरी करेंगे। बता दें कि यह मंदिर मुंबई के सबसे धनी मंदिरों में से एक है, जहां पर प्रतिदिन भारी संख्या में लोग आते हैं। माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है।